गजल—रूपेश पटेल

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  • २०७८ बैशाख ४, शनिबार (४ साल अघि)
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बैशाख ०४ गते
समयसे शरीर लोभित जवानी माङइअ
जिन्दगी एगो खूब सुन्दर कहानी माङइअ
बालुके रेत परती खेत तडपइअ जेना
ओहिना पिआसल लोग जिएला पानी माङइअ
जेकरा देखके लागे जन्म जन्मान्तरके नाता हए
ओइसन मन पसन साथी मित्र रानी माङइअ
बोली मिठास आँखमे प्यार ओठपर मुस्कान
देखके लोग सब कहे वाह एहन बानी माङइअ
सोचू काहे अइली दुनियाके मञ्चपर
गाँओ समाज देश विकास हेतु लगानी माङइअ ।
बलरा ११, सर्लाही

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